आज के समय में सोशल मीडिया पर लाखों लोग रील्स बनाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने सपनों को कभी मरने नहीं देते। उत्तर प्रदेश के छोटे से कस्बे टांडा के रहने वाले अशहाब अहमद अंसारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। UPSC जैसी कठिन परीक्षा में असफलता मिलने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर रील्स बनाना शुरू किया, लेकिन पढ़ाई का साथ कभी नहीं छोड़ा। कई बार असफलताओं का सामना करने के बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी और आखिरकार SSC CGL परीक्षा के माध्यम से Income Tax Department में Office Superintendent बनने का सपना पूरा कर लिया।
उनकी सफलता की कहानी आज लाखों युवाओं को यह संदेश देती है कि असफलता कभी भी अंतिम मंजिल नहीं होती। अगर व्यक्ति लगातार मेहनत करता रहे तो सफलता देर से सही, लेकिन जरूर मिलती है।

छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर
अशहाब अहमद अंसारी उत्तर प्रदेश के टांडा कस्बे से आते हैं। बचपन से ही पढ़ाई में अच्छे रहे और उन्होंने 10वीं तथा 12वीं में शानदार अंक प्राप्त किए। पढ़ाई के प्रति उनका झुकाव शुरू से था और इसी कारण उन्होंने इंजीनियरिंग करने का फैसला किया।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह कोटा भी गए, जहां देशभर के लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इसके बाद उन्हें कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश का अवसर मिला, लेकिन उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) को चुना और वहीं से अपनी B.Tech की पढ़ाई पूरी की।
इंजीनियरिंग के बाद UPSC का सपना
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद अशहाब ने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा। उस समय उनके ऊपर कोई बड़ी पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने पूरी तरह UPSC की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया।
साल 2017 में वह दिल्ली के प्रसिद्ध तैयारी केंद्र मुखर्जी नगर पहुंचे। यहां उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। लाखों अभ्यर्थियों की तरह उनका भी सपना IAS या IPS अधिकारी बनने का था।
लेकिन UPSC की परीक्षा जितनी प्रतिष्ठित है, उतनी ही कठिन भी मानी जाती है। कई वर्षों तक लगातार मेहनत करने के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली। UPSC Prelims में भी उन्हें निराशा हाथ लगी। हालांकि उन्होंने हार मानने के बजाय अपने विकल्प खुले रखे और SSC CGL की तैयारी भी साथ में शुरू कर दी।
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बार-बार सफलता के करीब पहुंचकर भी असफलता
कई बार ऐसा होता है कि मेहनत पूरी होती है लेकिन किस्मत साथ नहीं देती। अशहाब के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
SSC CGL परीक्षा में वह कई बार चयन के बेहद करीब पहुंचे। एक बार उनका चयन सिर्फ 0.5 अंक से रुक गया। दूसरी बार मात्र 1 अंक की कमी ने उनकी सफलता छीन ली।
सोचिए, जब कोई उम्मीदवार वर्षों तक मेहनत करे और सिर्फ आधे या एक नंबर से चयन से चूक जाए, तो उस पर क्या बीतती होगी। लेकिन अशहाब ने इन असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
उन्होंने खुद का विश्लेषण किया, गलतियों को पहचाना और तैयारी को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।
कोविड काल में शुरू हुई नई यात्रा
जब पूरी दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही थी, तब लाखों छात्रों की तरह अशहाब भी अपने घर लौट आए। उस दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया धीमी हो गई थी और उम्मीदवार अपने परिणामों का इंतजार कर रहे थे।
इसी समय उन्होंने सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाना शुरू किया। उनका पहला कंटेंट UPSC और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा था। धीरे-धीरे उन्हें लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा।
कुछ समय बाद उन्होंने Educational Reels बनानी शुरू कीं। उनके वीडियो छात्रों और युवाओं के बीच लोकप्रिय होने लगे। सोशल मीडिया पर उनकी पहचान बनने लगी और Followers की संख्या भी लगातार बढ़ती गई।
हालांकि इस दौरान उन्होंने पढ़ाई को कभी नहीं छोड़ा। दिन का एक हिस्सा कंटेंट क्रिएशन को देते थे और बाकी समय अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगाते थे। यही संतुलन आगे चलकर उनकी सफलता का आधार बना।
जब लोग कहने लगे – अब पढ़ाई छोड़ दी
सोशल मीडिया पर लोकप्रियता मिलने के बाद कई लोगों को लगा कि अशहाब अब पूरी तरह कंटेंट क्रिएटर बन चुके हैं और शायद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी छोड़ चुके हैं।
लेकिन वास्तविकता बिल्कुल अलग थी।
वह लगातार अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए थे। उनके लिए सोशल मीडिया केवल एक माध्यम था, लक्ष्य नहीं। उनका असली लक्ष्य सरकारी सेवा में जाना था।
यही कारण था कि कंटेंट बनाने के साथ-साथ उन्होंने SSC CGL की तैयारी भी जारी रखी। वह जानते थे कि एक दिन उनकी मेहनत जरूर रंग लाएगी।
1 नंबर ने बदली जिंदगी
अप्रैल 2026 में SSC CGL 2025 का परिणाम घोषित हुआ। परिणाम देखने के बाद अशहाब को पता चला कि उन्हें 311 अंक मिले हैं।
लेकिन कटऑफ 312 अंक थी।
यानी एक बार फिर वह केवल 1 अंक से चयन से चूक गए।
यह किसी भी उम्मीदवार के लिए बेहद निराशाजनक स्थिति हो सकती थी। वर्षों की मेहनत के बाद सिर्फ एक अंक का अंतर सपना तोड़ सकता था।
लेकिन किस्मत ने इस बार उनके लिए कुछ अलग सोच रखा था।
कुछ समय बाद SSC CGL 2025 का Revised Result जारी हुआ। संशोधित परिणाम में कटऑफ घटकर 311 अंक हो गई।
अब वही 311 अंक, जो पहले असफलता का कारण बने थे, उनकी सफलता का आधार बन गए। उन्हें Income Tax Department में Office Superintendent का पद मिल गया।
यह पल उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। वर्षों का संघर्ष, असफलताएं, मानसिक दबाव और लगातार की गई मेहनत आखिरकार रंग लाई।
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सोशल मीडिया और पढ़ाई का बेहतरीन संतुलन
अशहाब की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह साबित किया कि सोशल मीडिया और पढ़ाई एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
अगर सही तरीके से समय का प्रबंधन किया जाए तो व्यक्ति दोनों क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने सोशल मीडिया का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं किया बल्कि शिक्षा और प्रेरणा से जुड़े कंटेंट तैयार किए। साथ ही अपनी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को भी जारी रखा।
आज के युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण सीख है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग सही दिशा में किया जाए तो वह अवसरों के नए दरवाजे खोल सकता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अशहाब अहमद अंसारी की कहानी केवल एक सरकारी नौकरी मिलने की कहानी नहीं है। यह धैर्य, संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी है।
उन्होंने दिखाया कि असफलता के बाद भी व्यक्ति दोबारा खड़ा हो सकता है। UPSC में असफलता मिली, SSC CGL में कई बार कुछ अंकों से चयन रुका, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को खत्म नहीं होने दिया।
आज जब लाखों युवा एक-दो असफलताओं के बाद निराश हो जाते हैं, तब अशहाब की यात्रा उन्हें प्रेरित करती है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास करना जरूरी है।
उनकी कहानी यह बताती है कि सफलता और असफलता के बीच का अंतर कई बार सिर्फ एक कदम का होता है। जो लोग आखिरी तक डटे रहते हैं, वही अंत में जीत हासिल करते हैं।
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निष्कर्ष
अशहाब अहमद अंसारी का सफर संघर्ष, धैर्य और मेहनत का शानदार उदाहरण है। टांडा के एक साधारण छात्र से लेकर Income Tax Department के अधिकारी बनने तक की उनकी यात्रा आसान नहीं रही। UPSC में असफलता, SSC CGL में बार-बार कुछ अंकों से चूकना और फिर सोशल मीडिया के माध्यम से नई पहचान बनाना—इन सभी चुनौतियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा।
आज उनकी सफलता लाखों प्रतियोगी छात्रों को यह विश्वास दिलाती है कि यदि मेहनत ईमानदारी से की जाए और हार न मानी जाए, तो सफलता देर-सवेर जरूर मिलती है। अशहाब की कहानी हमें यही सिखाती है कि सपने तभी पूरे होते हैं जब हम मुश्किल समय में भी उन्हें जिंदा रखते हैं।
Last Updated: June 1, 2026
