UPSC को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों छात्र UPSC Civil Services Examination में बैठते हैं, लेकिन सफलता केवल कुछ उम्मीदवारों को ही मिल पाती है। इस परीक्षा में सफलता केवल किताबों की जानकारी से नहीं मिलती, बल्कि धैर्य, मानसिक मजबूती, अनुशासन और लगातार प्रयास की भी आवश्यकता होती है। उत्तर प्रदेश के बागपत की रहने वाली रूपल राणा की कहानी इसी संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है।

रूपल राणा ने UPSC Civil Services Examination 2023 में All India Rank 26 हासिल की। लेकिन यह सफलता उन्हें पहले प्रयास में नहीं मिली। उन्हें लगातार तीन बार प्रीलिम्स परीक्षा में असफलता का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं, इंटरव्यू से पहले उनकी मां का निधन हो गया, जिसने उनके जीवन को पूरी तरह झकझोर दिया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में UPSC में शानदार सफलता हासिल कर पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गईं।

बागपत से शुरू हुआ UPSC का सपना

रूपल राणा उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से संबंध रखती हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा बागपत में हुई। स्कूल के दिनों से ही वह पढ़ाई में काफी अच्छी थीं। दसवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने राजस्थान के पिलानी में अपनी आगे की शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से गणित विषय में स्नातक की पढ़ाई की। गणित में उनकी पकड़ काफी मजबूत थी और कॉलेज में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।

कॉलेज के दौरान ही उन्हें UPSC परीक्षा के बारे में विस्तार से जानकारी मिली। उन्होंने महसूस किया कि सिविल सेवा के माध्यम से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यहीं से उनके भीतर IAS अधिकारी बनने का सपना जन्मा।

विज्ञान की छात्रा के लिए UPSC की चुनौती

रूपल का शैक्षणिक बैकग्राउंड पूरी तरह गणित और विज्ञान से जुड़ा हुआ था। UPSC की तैयारी शुरू करने के बाद उन्हें इतिहास, राजनीति, समाजशास्त्र और समसामयिक घटनाओं जैसे विषयों से सामना करना पड़ा। शुरुआत में यह उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा।

लेकिन उन्होंने इस चुनौती से घबराने के बजाय उसे स्वीकार किया। उन्होंने बुनियादी किताबों से शुरुआत की और धीरे-धीरे UPSC के विशाल सिलेबस को समझना शुरू किया। यही उनकी सफलता की पहली सीढ़ी साबित हुई।

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लगातार तीन बार मिली असफलता

UPSC की तैयारी करने वाले अधिकांश उम्मीदवारों के लिए असफलता सबसे बड़ी चुनौती होती है। रूपल राणा को भी इसका सामना करना पड़ा।

उनका पहला प्रयास पूरी तरह तैयारी के उद्देश्य से था। वह परीक्षा के पैटर्न को समझना चाहती थीं। इसलिए उस प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली।

दूसरे और तीसरे प्रयास में उन्होंने काफी मेहनत की, लेकिन फिर भी प्रीलिम्स परीक्षा पास नहीं कर सकीं। बाद में उन्होंने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और पाया कि परीक्षा हॉल में वह नकारात्मक अंकन के डर से बहुत कम प्रश्न हल करती थीं।

दूसरे प्रयास में उन्होंने लगभग 71 प्रश्नों के उत्तर दिए जबकि तीसरे प्रयास में करीब 78 प्रश्न ही हल किए। यही उनकी सबसे बड़ी रणनीतिक गलती साबित हुई।

असफलता से सीखा और रणनीति बदली

अधिकतर उम्मीदवार बार-बार असफल होने के बाद निराश हो जाते हैं, लेकिन रूपल ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने अपनी तैयारी का गहराई से विश्लेषण किया।

उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को ध्यान से पढ़ना शुरू किया। UPSC के प्रश्न पूछने के तरीके को समझा। नियमित रूप से मॉक टेस्ट देने लगीं और अपनी गलतियों पर काम किया।

धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा। उन्होंने उत्तर देने की क्षमता में सुधार किया और जोखिम लेने की मानसिकता विकसित की।

चौथे प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स परीक्षा में लगभग 94 प्रश्नों के उत्तर दिए। इसका परिणाम यह हुआ कि वह कटऑफ से काफी अधिक अंक प्राप्त करके आसानी से अगले चरण में पहुंच गईं।

सीमित स्रोतों से तैयारी का मंत्र

आज के समय में अधिकांश UPSC उम्मीदवार नई-नई किताबों और कोचिंग सामग्री के पीछे भागते रहते हैं। लेकिन रूपल राणा का मानना है कि सफलता का असली रहस्य सीमित और भरोसेमंद स्रोतों में छिपा है।

उनके अनुसार एक किताब को कई बार पढ़ना ज्यादा फायदेमंद है, बजाय इसके कि कई किताबें केवल एक बार पढ़ी जाएं।

उन्होंने बार-बार रिवीजन को अपनी तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। इसी कारण परीक्षा के दौरान उन्हें विषयों को याद रखने में आसानी हुई।

राजनीति विज्ञान को चुना वैकल्पिक विषय

गणित की छात्रा होने के बावजूद रूपल ने Optional Subject के रूप में Political Science and International Relations (PSIR) को चुना।

उनका मानना था कि यह विषय General Studies के कई हिस्सों में मदद करेगा। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय संबंध और शासन व्यवस्था जैसे विषयों में उनकी रुचि भी बढ़ रही थी।

उन्होंने नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़े, अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का अध्ययन किया और उत्तर लेखन का अभ्यास किया। यही रणनीति उनके लिए काफी लाभदायक साबित हुई।

मुख्य परीक्षा की अलग रणनीति

UPSC Mains परीक्षा केवल जानकारी की परीक्षा नहीं होती, बल्कि उत्तर लेखन की क्षमता भी जांचती है।

रूपल ने प्रत्येक विषय के लिए अलग नोट्स तैयार किए। उन्होंने समस्या, कारण और समाधान आधारित उत्तर लिखने की आदत विकसित की।

समसामयिक घटनाओं के उदाहरणों को अपने उत्तरों में शामिल किया। नैतिकता (Ethics) पेपर के लिए उन्होंने महात्मा गांधी, रामायण और महाभारत जैसे स्रोतों से उदाहरण तैयार किए।

उनका मानना था कि अच्छे उत्तर केवल तथ्यों से नहीं बल्कि संतुलित दृष्टिकोण और उदाहरणों से बनते हैं।

मां के निधन ने तोड़ दी जिंदगी

रूपल राणा की UPSC यात्रा का सबसे भावुक अध्याय उनकी मां से जुड़ा है।

साक्षात्कार से केवल दो महीने पहले उनकी मां का अचानक निधन हो गया। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा व्यक्तिगत आघात था। जिस व्यक्ति ने हमेशा उनका साथ दिया, वही अचानक इस दुनिया से चला गया।

ऐसी परिस्थिति में कई लोग तैयारी छोड़ देते हैं या मानसिक रूप से टूट जाते हैं। लेकिन रूपल ने अपनी मां के सपनों को याद किया और खुद को संभाला।

उन्होंने अपने दुख को कमजोरी नहीं बनने दिया बल्कि उसे अपनी ताकत में बदल दिया। यही मानसिक मजबूती उन्हें बाकी उम्मीदवारों से अलग बनाती है।

इंटरव्यू में दिखाई ईमानदारी और आत्मविश्वास

UPSC Interview को परीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। रूपल ने अपने Detailed Application Form (DAF) से जुड़े हर विषय की तैयारी की।

उन्होंने कई मॉक इंटरव्यू दिए और अनुभवी लोगों से फीडबैक लिया।

इंटरव्यू के दौरान उनसे राजनीति विज्ञान, गणित, शिक्षा, समसामयिक घटनाओं और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े प्रश्न पूछे गए।

उन्होंने हर प्रश्न का उत्तर ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ दिया। इसी का परिणाम था कि उन्हें इंटरव्यू में 201 अंक प्राप्त हुए, जिसने उनकी अंतिम रैंक को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। (Live Hindustan)

UPSC उम्मीदवारों के लिए सीख

रूपल राणा की कहानी केवल एक सफलता की कहानी नहीं है। यह उन लाखों उम्मीदवारों के लिए संदेश है जो बार-बार असफल होने के बाद निराश हो जाते हैं।

उनकी यात्रा हमें सिखाती है कि असफलता अंत नहीं होती। सही विश्लेषण, सही रणनीति और लगातार मेहनत किसी भी उम्मीदवार को सफलता तक पहुंचा सकती है।

उन्होंने साबित किया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास लगातार जारी रहें तो सफलता अवश्य मिलती है।

निष्कर्ष

UPSC AIR 26 रूपल राणा की कहानी संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की असाधारण मिसाल है। तीन बार प्रीलिम्स में असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। मां के निधन जैसी बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटने दिया।

आज उनकी सफलता लाखों UPSC अभ्यर्थियों को प्रेरणा देती है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जो कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ना नहीं छोड़ते। रूपल राणा ने यह साबित कर दिया कि असफलताएं केवल सफलता की तैयारी होती हैं और लगातार प्रयास करने वालों को एक दिन जरूर जीत मिलती है।

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Last Updated: June 2, 2026

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